अररिया,(रिपोर्ट-अरुण कुमार):बिहार के अररिया में एक डिग्री वाले फ्रॉड डॉक्टर की वजह से एक गरीब के घर में आज के बाद कभी भी छठ पूजा नहीं होगा,इस घर में छठ की खरीददारी भी हो गयी थी,बुधवार को इस डॉक्टर के दलाल ने सदर अस्पताल जा रहे एक नवजात शिशु की अच्छी चिकित्सा का दावा करते हुए इन्हें रोका और इलाज किया| 20 दिन की नवजात बच्ची को इंजेक्शन दिया गया और उस मासूम ने 30 मिनट के अन्दर ही दम तोड़ दिया| उस नवजात बच्ची ने एक निर्धन के घर में जन्म लिया शायद यही उसकी गलती थी,उसके पिता मजदूर थे इसलिए न क्लिनिक में न हंगामा हुआ और न ही मिडिया की सुर्खियाँ ही वो बटोर पाई वो अभागन, हम इस डॉक्टर को फ्रॉड की संज्ञा इसलिए भी दे रहे है कि सदर अस्पताल में पोस्टेड डॉक्टर साहब अपनी सेवा रोजाना रानीगंज के निजी क्लिनिक में दे रहे है, इतना ही नहीं जब हम बच्ची के मौत की वजह पूछने आये तो खुद तो भाग खड़े हुए और अपने लठैतों को कवरेज रोकने के लिए भी कहा और कैमरे को छीने लगा बदसलूकी करने लगा, जब हमने इसकी जानकारी सिविल सर्जन को दी तब जाकर पुरे 2 घंटे के बाद डॉक्टर साहब नीचे उतरे और अपनी ही दलील सुना दी,

बता दें कि डॉक्टर अवधेश कुमार सदर अस्पताल में फ़िलहाल पोस्टेड है और रानीगंज में ही रोजाना निजी क्लिनिक चलाते है. यह पूर्व में अवैध तरीके से सदर अस्पताल में ACMO के पद भी कब्ज़ा जमा चुके है. यह बात उन्होंने खुद कैमरे पर कबुली है और कहा कि इसके लिए सरकार दोषी है मै नहीं. वही उन्होंने ईलाज के पूर्व ही बच्ची की मौत की बात कही जबकि परिजनों ने बताया कि सुई देने के बाद ही मौत हुई है|

वीडियो-डॉक्टर अवधेश कुमार आवास,पूर्व ए.सीएम.ओ,अररिया

ये हैं रानीगंज के बरहरा गांव निवासी मलय पासवान जिनके घर में छठ की सारी खरीददारी हो चुकी थी आज छठ भी करना था लेकिन आज के बाद इनके घर में कभी छठ पूजा नहीं होगा. इनकी 20 दिन की बेटी को खांसी और जुकाम हो गया था वो इलाज के लिए शहर जा रहे थे. लेकिन डॉक्टर के दलालों ने इन्हें रोका और इलाज किया जिसमे इनकी मासूम बच्ची की मौत हो गयी. मलय बताते है कि वो खुद मजदुर है इसलिए मजबूर भी. करें तो क्या करें और किसे सुनाए. उधर माँ का भी रो रो कर बुरा हाल है|

विडियो-पिता-मलय पासवान और माँ-मीणा देवी शोक में बैठी हुई|

इनके पडोसी बचनी देवी अपनी बात कहते हुए कही कि छठ में हीं इनके घर में मौत हुई है सो अब इनके घर कभी छठ नहीं हो सकेगा. रानीगंज के स्थानीय निवासियों ने भी डॉक्टर और दलालों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस बच्चे का शव थाना में पड़ा हुआ था और मामले को रफादफा करने के लिए डेढ़ लाख रूपये में सौदेबाजी भी हुई है|

वही जब हमने इस बावत अररिया सदर अस्पताल के उपाधीक्षक से पूछा तो उनहोंने इस मामले से खुद को बचाते हुए कहा कि मुझे भी सुनने को मिला है कि डॉक्टर अवधेश कुमार सदर अस्पताल छोड़ रोजाना खुद का निजी क्लिनिक चला रहे है.

अररिया के डी एम हिमांशू शर्मा अपना बयान देते हुए कहे की प्रशासन ख़ामोश और पीड़ित लाचार है ऐसे में कोई इन्साफ की उम्मीद किससे करे. जिले में अकसर फर्जी डॉक्टर की चपेट में मौत हो रही है. लेकिन सबसे बड़ी बात उस मासूम की मौत कैसे हुई ? परिजनों ने इलाज के दौरान डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है वही डॉक्टर साहब खुद को बचाते-भागते फिर रहे है. सवाल सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर भी .आखिर कैसे कोई सदर अस्पताल में एसीएमओ के पद से अचानक उनका डिमोशन हो जाता है और कैसे इतनी दूर क्लिनिक चलाई जा रही है. बच्ची को मर चुकी लेकिन अपने पीछे सिस्टम के लिए कई सवाल भी छोड़ गयी|

विडियो-डॉक्टर अवधेश कुमार अपना बयान देते हुए,

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