शर्मीला चौहान की कलम से

मैंने अपनी पहली पोस्ट को उस व्यक्ति को समर्पित किया जो मेरे अस्तित्व का कारण है, मेरे माता-पिता। मैं वास्तव में यह विश्वास करती हूं कि भगवान हर जगह नहीं हो सकते हैं, इसलिए उन्होंने माता-पिता बनाया, जिन्होंने हमें बनाया … मैंने कभी अपनी भावनाओं को आपसे व्यक्त नहीं किया,3 साल हो गए आपसे अलग रहते हुए, हर दिन गिनती हूृ़ँ की कब आपसे मिलूंगी, आदत नहीं थी ना आपलोगों के बिना रहने की पर कहीं ना कहीं यह दूरीयां मुझे मजबूत बनाती है और केन्द्रित रहने में मदद करती हैं जब भी मैं घर से वापस लौटती हूं तो जो दर्द मैं महसूस करती हूँ वही दर्द मुझे बताता है कि मुझे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना है, मुझे याद है की हमदोनों के आँखो आँसू होते थे जब मेरी ट्रेन खुलती थी और आप मेरी आँखो से ओझल होते थे, जब भी मैं कमजोर महसूस करती हूं, मैं सिर्फ अपनी आंखें बंद करती हूं और मेरे चारों ओर अकेलापन महसूस करती हूं, यह मुझे मजबूत बनाता है।

मुझे पता है कि इस तरह से मुश्किल और लंबा है, लेकिन यदि आप मेरे साथ हैं तो मैं हर बाधा पार कर जाएगा, तुम मेरी ताकत हो। मुझे यह पता है कि जब भी मुझे लगता है कि मैं कमजोर महसूस करता हूं तो आप मुझे प्रसन्न करने के लिए वहां रहेंगे। मुझे हमेशा आपके उन शब्दों को याद है कि “आपको यह तय करना होगा कि आप रंगीन जीवन या रंगहीन व्यक्ति को चुनना चाहते हैं” और मैं उस रंगीन को पसंद करता हूं। मुझे पता है कि मैं एक शानदार छात्र नहीं हूं लेकिन मैं एक अच्छी बेटी बनने की कोशिश कर रहा हूं। मैं शानदार जीवन जीना नहीं चाहता लेकिन मैं आपको सभी लक्जरी देना चाहता हूं और आपको एक दिन गर्व महसूस करना चाहता हूं क्योंकि मैं अपने चेहरे पर उस अनमोल मुस्कुराहट को देखना चाहता हूं जिसे मैंने कभी नहीं देखा है ..

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